| 'आई' ! म्हणोनि कोणी | आईस हांक मारी | |
| ती हांक येई कानी | मज होय शोककारी l | |
| नोहेच हांक, माते | मारी कुणी कुठारी, | |
| आई कुणा म्हणू मी? | आई घरी न दारीं! l | |
| ही न्यूनता सुखाची | चित्ता सदा विदारी | |
| स्वामी तिन्ही जगांचा | आईविना भिकारी ll १ ll | |
| चारा मुखी पिलांच्या | चिमणी हळूच देई | |
| गोट्यांत वासरांना | ह्या चाटतात गाई l | |
| वात्सल्य हें पशूंचें | मी रोज रोज पाहीं | |
| पाहून अंतरात्मा | व्याकूळ हाय होई l | |
| वात्सल्य माउलीचें | आम्हां जगांत नाहीं | |
| दुर्भाग्य याविना का? | आम्हांस नाहिं आई ll २ ll | |
| शाळेतुनी घराला | येतां धरील पोटीं | |
| काढून ठेविलेला | घालील घास ओठीं l | |
| उष्टया तशा मुखाच्या | धांवेल चुंबना ती | |
| कोणी तुझ्याविना गे | का ह्या करील गोष्टी? l | |
| तूझ्याविना न कोणी | लावील सांजवाती | |
| सांगेल ना म्हणाया | आम्हां 'शुभं करोति' ll ३ ll | |
| ताईस या कशाची | जाणीव काहिं नाहीं | |
| त्या सान बालिकेला | समजे न यांत कांहीं l | |
| पाणी तरारतांना | नेत्रांत, बावरे ही | |
| ऐकूनी घे परंतू | "आम्हांस नाहिं आई" l | |
| सांगे तसे मुलींना | "आम्हांस नाहिं आई" | |
| ते बोल येति कानीं | "आम्हांस नाहिं आई" ll ४ ll | |
| आई! तुझ्याच ठायीं | सामर्थ्य नंदिनीचें | |
| माहेर मंगलाचें | अद्वैत तापसांचें l | |
| गांभीर्य सागराचें | औदार्य या धरेचें | |
| नेत्रांत तेज नाचे | त्या शांत चंद्रिकेचें l | |
| वात्सल्य गाढ पोटी | त्या मेघमंडळाचें | |
| वात्सल्य या गुणांचें | आई, तुझ्यांत साचें ll ५ ll | |
| गुंफुनी पूर्वजांच्या | मी गाईलें गुणांला | |
| सार्या सभाजनांनीं | या वानिले कृतीला l | |
| आई! करावया तूं | नाहीस कौतुकाला | |
| या न्यूनतेमुळे ही | मज त्याज्य पुष्पमाला l | |
| पंचारती जनांची | ना तोषवी मनाला | |
| परि जीव बालकाचा | तव कौतुका भुकेला ll ६ ll | |
| येशील तूं घराला | परतून केधवां गे ? | |
| दवडूं नको घडीला | ये ये निघून वेगें l | |
| हे गुंतले जिवीचे | पायी तुझ्याच धागे l | |
| कर्तव्य माउलीचें | करण्यास येइं वेगें | |
| रुसणार मी न आतां | जरि बोलशील रागें | |
| ये रागवावयाही | परि येइ येइ वेगें ll ७ ll |
— यशवंत (यशवंत दिनकर पेंढरकर)